مقدمه:
تغذيه صحيح يكي از اصول اوليه دستيابي به كشاورزي پايدار است. متاسفانه در كشور ما تا چند سال گذشته تنها به استفاده از دو عنصر ازت و فسفر و گاهي نيز پتاسيم توجه ميشد و از ساير عناصر كه براي رشد و نمو گياه و توليد عملكردهاي بالا ضروري ميباشند، غفلت ميگرديد. طي چند سال گذشته و با پيگيريهاي محققين و دستاندركاران مؤسسه تحقيقات خاك و آب، اعضاي هيات علمي و دانشجويان دانشگاههاي كشور تا حدودي به مصرف عناصر غذايي ديگر نيز نظير پتاسيم، روي، بور، آهن و 000 توجه گرديد. بررسي اين ميزان از مطالعات هنوز كافي نبوده و فرهنگسازي براي ترويج مصرف بهينه اين عناصر غذايي، مواد آلي و كودهاي بيولوژيك و 000 جاي كار بسيار دارد .
مواد غذايي داراي نقشهاي ويژه و ضروري در سوخت و ساز گياه هستند. بر پايه نياز گياهان عناصر غذايي به دو گروه عناصر پرنياز (ازت، فسفر، پتاسيم، گوگرد، كلسيم و منيزيم) و عناصر كمنياز (آهن، روي، منگنز، مس و بور) تقسيم ميشوند. البته اين بدان معني نيست كه اهميت عناصر كمنياز (كممصرف و يا ريزمغذي) كمتر از عناصر پرنياز ميباشد، بلكه تنها ميزان مصرف آنها متفاوت است. در برخي از درختان ميوه نظير سيب مشاهده ميشود كه ميزان كلسيم در بعضي موارد برابر و حتي بيشتر از فسفر مورد نياز ميباشد كه اين امر نشان دهندة اهميت كلسيم است كه توجه چنداني در گذشته در كشور به آن نشده است. كلسيم (Ca) در جلوگيري از سياه شدن، پوسيدگي دروني، آردي شدن، آبگزيدگي، لكه تلخ و 000 در درختان ميوه نظير سيب و گلابي يك عنصر ضروري به شمار ميرود.
اميد است كه باغداران عزيز با بهرهگيري از تجربه محققين و بكارگيري نتايج آزمون خاك و تجزيه برگ و ميوه از مصرف بيرويه كودهاي شيميايي بويژه ازتي و فسفري اجتناب كنند. به همين منظور بر آن شديم حد بهينه غلظت عناصر غذايي در خاك، برگ و ميوه محصول باغي كشور را تعيين تا گامي به سوي افزايش كمي و كيفي محصولات كشاورزي، نيل به كشاورزي پايدار و افزايش صادرات توليدات كشاورزي توام با كيفيت برتر در كشور برداشته باشيم. در شكل 2 رابطه غلظت عناصر غذايي با افزايش عملكرد نشان داده شده است (ملكوتي و همايي، 1383).
در جدول يك حد بحراني غلظت عناصر غذايي در خاكهاي آهكي نشان داده شده است.
جدول 1- حد بحراني غلظت عناصر غذايي در خاكهاي زراعي و باغي
| كربنآلي | فسفر | پتاسيم | آهن | روي | منگنز | مس | بور |
| (درصد) | (ميليگرم در كيلوگرم) | ||||||
| 2 > | 10-7 | 300-250 | 10 | 1 | 8 | 1 | 1 |
1- سيب: حدود 30 تا 50 برگ سالم در اواسط فصل رشد (در حدود 8 تا 10 هفته پس از شكوفهدهي كامل) براي تجزيه انتخاب ميشوند. از برگهاي وسط شاخه هاي رشد كرده در فصل جاري استفاده مي شود.
جدول 2- حد بهينه عناصر غذايي پرنياز و كمنياز در برگ سيب*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 3/2-2/2 | 2/0-1/0 | 0/2-2/1 | 0/2-8/1 | 5/0-4/0 | 4/0-2/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-100 | 100-70 | 70-40 | 20-10 | 70-30 | 2/0-1/0 |
** مقدار ازت ذكر شده براي رقم Red Delicious ميباشد. براي ساير ارقام كمي متفاوت ميباشد.
جدول 3- حد مطلوب غلظت عناصر غذايي در ميوه سيب
| ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) | |||||
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | ||||||||||||||
| 60-40 | 15-10 | 200-130 | 8-5 | 7-5 | 3/0-2/0 | 1/0 | 1/0 | 05/0 | 50/0 | |||||
| ماده خشك (درصد) |
سفتيميوه (kg/cm2) |
قند كل | اسيديتهكل (اسيدماليك) | Brix | pH | |||||||||
| (گرم در 100 ميليليتر آب ميوه) | ||||||||||||||
| 0/14 | 6 > | 15-13 | 40/0 | 14 | 0/4 | |||||||||
| N/Ca | K/Ca | Ca/Mg | نيترات NO3- | كادميم Cd | ||||||||||
| (mg/kg FW)** | (mg/kg DW)** | |||||||||||||
| 10 | 25 | 5/1 | 80< | 10/0< | ||||||||||
* اعداد حد مطلوب ميتواند نسبت به رقم گياه، موقعيت جغرافيايي محل، نحوه مديريت، نحوه نمونهبرداري و عملكرد متفاوت باشد، لذا تفسير نتايج بر عهده متخصصين مربوطه است.
** FW = وزن تازه، DW= وزن خشك
2ـ هلو: نمونه برداري در اواسط فصل رشد و از برگهاي بالغ جديد كه بر روي شاخههاي فصل رشد جاري قرار گرفته اند، به تعداد 25 تا 50 برگ صورت ميگيرد.
جدول 4- حدود بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگ هلو*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 0/3-5/2 | 3/0-2/0 | 2/3-2/2 | 5/2-7/1 | 8/0-5/0 | 3/0-2/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-100 | 150-70 | 50-30 | 20-15 | 80-30 | 2-1 |
**در بين عناصر، بيشترين ميزان نياز هلو به ازت و پتاسيم ميباشد. در خاكهاي شني ممكن است كمبود گوگرد ايجاد شود.
جدول 5- حد مطلوب غلظت عناصر غذايي در ميوه هلو*
| ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | ||||||
| 150 | 20 | 200 | 7 | 10 | 25/0 | 10/0 |
| روي (Zn) |
مس (Cu) |
ويتامين C |
ماده خشك |
قند كل | نيترات (NO3) | |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | (درصد) | (mg/kg FW) | ||||
| 17/0 | 07/0 | 7 | 1/11 | 39/8 | 80 < | |
3ـ گلابي: حدود 30 تا 50 عدد برگ سالم در اواسط فصل رشد و از وسط شاخه هاي فصل رشد اخير جمعآوري ميشود.
جدول 6- حدود بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگ گلابي*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 5/2-0/2 | 20/0-15/0 | 5/2-0/2 | 0/2-5/1 | 5/0-25/0 | 30/0-1/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-130 | 100-20 | 50-20 | 20-10 | 60-20 | 2/1-1/0 |
* ارقام فوق با توجه به رقم، شرايط اقليمي، نحوه مديريت زراعي، عمليات بهزراعي و نحوه تغذيه متغير ميباشد.
جدول 7- حد مطلوب غلظت عناصر غذايي در ميوه گلابي*
| ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | ||||||
| 80 | 11 | 121 | 4 | 8 | 2/0 | 1/0 |
| روي (Zn) | مس (Cu) |
ويتامين C |
ماده خشك |
قند كل | نيترات (NO3) | |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | (درصد) | (mg/kg FW) | ||||
| 1/0 | 05/0 | 5 | 7/11 | 05/7 | 80< | |
4- آلو: از 25 برگ كامل (پهنك و دمبرگ) از وسط شاخه ها و در تيرماه نمونه برداري مي شود.
جدول 8- حدود بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگهاي آلو*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 0/3-4/2 | 3/0-1/0 | 0/3-6/1 | 0/3-5/1 | 8/0-5/0 | 3/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-100 | 100-70 | 50-30 | 15-10 | 50-30 | 2-1 |
جدول 9- حد مطلوب غلظت عناصر غذايي در ميوه آلو*
| ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | ||||||
| 110 | 15 | 160 | 6 | 8 | 17/0 | 05/0 |
| روي (Zn) |
مس (Cu) |
ويتامين C |
ماده خشك |
قند كل | نيترات (NO3) | |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | (درصد) | (mg/kg FW) | ||||
| 1/0 | 06/0 | 5/9 | 8/12 | 9/9 | 100< | |
5- زردآلو: نمونه برداري مي بايست از50 برگ كاملاً توسعه يافته از وسط شاخه هاي فصل رشد جاري در اواخر تيرماه صورت گيرد.
جدول 10- حدود بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگهاي زردآلو*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 5/2-0/2 | 3/0-1/0 | 5/2-0/3 | 6/1-5/1 | 3/0-2/1 | 3/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم DW) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
كادميم (Cd) |
| 150-70 | 100-25 | 100-20 | 25-4 | 70-25 | - |
جدول 11- حد مطلوب غلظت عناصر غذايي در ميوه زردآلو*
| ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | ||||||
| 225 | 25 | 260 | 15 | 12 | 39/0 | 08/0 |
| روي (Zn) |
مس (Cu) |
ويتامين C |
ماده خشك |
قند كل | نيترات (NO3) | |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | (درصد) | (mg/kg FW) | ||||
| 10/0 | 08/0 | 10 | 6/13 | 24/9 | 80< | |
6- آلبالو: از 50 برگ كاملاً توسعه يافته از وسط شاخه هاي فصل رشد اخير در تيرماه مي توان براي تجزيه استفاده كرد.
جدول 12- حدود بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگهاي آلبالو*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 0/3-6/2 | 2/0-2/0 | 4/2-6/1 | 5/2-5/1 | 7/0-5/0 | 3/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
كادميم (Cd) |
| 200-100 | 100-70 | 50-30 | 20-10 | 50-30 | - |
غلظت نيترات در ميوه آلبالو ميبايست كمتر از 100 ميليگرم بر كيلوگرم وزن تازه باشد.
7- گيلاس: از 50 برگ كاملاً توسعه يافته از اواسط شاخه هاي فصل رشد جاري در تيرماه نمونه برداري مي شود.
جدول 13- حد بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگهاي گيلاس*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 0/3-1/2 | 5/0-1/0 | 0/3-5/2 | 0/3-0/2 | 8/0-3/0 | 3/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 250-100 | 200-20 | 50-20 | 50-5 | 100-20 | 2-1 |
8- بادام: در اواسط فصل رشد به تعداد 50 برگ كاملاً توسعه يافته از وسط شاخهها در تيرماه نمونهبرداري مي شود.
جدول 14- حد بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگهاي بادام*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 5/2-2/2 | 20/0-15/0 | 0/2-5/1 | 0/3-0/2 | 5/0-2/0 | 4/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-100 | 80-60 | 40-30 | 10-5 | 60-50 | 2-1 |
جدول 15- حد مطلوب عناصر غذايي در ميوه بادام
| نيتروژن | فسفر | پتاسيم | كلسيم | منيزيم | آهن |
| برحسب ميليگرم در 100 گرم ماده تازه | |||||
| 550-475 | 1000-750 | 350-250 | 300-275 | 5/5-5/4 | |
| منگنز | مس | روي | بور | ميزان پروئين | |
| برحسب ميليگرم در 100 گرم ماده تازه | (درصد) | ||||
| 5/3-5/2 | 5/1-0/1 | 0/4-5/3 | 25-20 | ||
جدول 16- حد بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگ گردو*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 5/2-2/2 | 2/0-1/0 | 5/2-5/1 | 0/3-5/1 | 7/0-5/0 | 3/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-100 | 100-60 | 50-40 | 15-10 | 60-50 | 2-1 |
10ـ انگور: معمولاً از برگهاي بالغ جديد كه روبروي خوشه هاي انگور قرار دارند و در اواسط تابستان قبل از متورم شدن حبه هاي انگور استفاده ميشود.
جدول 17- حدود بهينه عناصر غذايي پرمصرف و كم مصرف در برگ انگور*
| عناصر پرنياز (درصد) |
ازت N)) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
گوگرد (S) |
| 5/2-0/2 | 2/0-1/0 | 5/2-0/2 | 0/3-0/2 | 0/1-5/0 | 3/0 | |
| عناصر كمنياز (ميليگرم در كيلوگرم) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
روي (Zn) |
مس (Cu) |
بور (B) |
موليبدن (Mo) |
| 150-100 | 100-70 | 75-25 | 20-10 | 100-50 | 2-1 |
جدول 18- حد مطلوب غلظت عناصر غذايي در ميوه انگور*
| ازت (N) |
فسفر (P) |
پتاسيم (K) |
كلسيم (Ca) |
منيزيم (Mg) |
آهن (Fe) |
منگنز (Mn) |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | ||||||
| 115 | 20 | 191 | 10 | 10 | 3/0 | 1/0 |
| روي (Zn) | مس (Cu) |
ويتامين C |
ماده خشك |
قند كل | نيترات (NO3) | |
| (ميليگرم در 100 گرم ماده خوراكي) | (درصد) | (mg/kg FW) | ||||
| 1/0 | 5/0 | 15 > | 19 | 20 | 60 < | |
مصرف زياد كود ازته، پنبه را پژمرده ميكند
مصرف زياد كود ازته باعث افزايش بيشتر پژمردگي پنبه ميشود.
بيماري پژمردگي ورتيسيليومي پنبه با نام علمي Verticillium dahliae يكي از مهمترين و شايعترين بيماريهاي پنبه در تمام نقاط پنبهكاري است.
عامل بيماري يك نوع قارچ است كه قادر است خسارات سنگيني را به محصول وارد سازد.
اين بيماري از تمام مناطق پنبه كاري گرگان و مازندران گزارش شده است و علاوه بر سواحل شمالي بيماري پژمردگي پنبه در ساير نقاط نيز وجود دارد.
پژمردگي ناشي از ورتيسيليوم پنبه نسبت به دما واكنش شديدي نشان ميدهد و با كاهش دما مقاومت در برابر بيماري به سرعت كاهش مييابد.
نشانههاي بيماري ابتدا در لپهها ظاهر ميشود كه قبل از بلوغ، لپهها زرد شده و به سرعت خشك ميشوند. همچنين پژمردگي پنبه باعث ريزش شاخههاي بارور و غوزهها نيز ميشود.
يكي از عوامل اصلي پژمردگي گياه اختلال در انتقال آب در اثر توسعه بيماري است و در پنبههاي حساس علايم بيماري به سرعت پيشرفت ميكند و بوتهها نيز ممكن است در صورت مساعد بودن شرايط محيطي براي بيماري قبل از بلوغ بميرند.
كشت ارقام مقاومي مانند بختگان، ساي اكرا، ساحل و ديگر ارقام از راههاي كنترل بيماري است. ضد عفوني بذور با سموم نيز در مبارزه با بيماري موثر است.
بر اساس يافتههاي پژوهشگران آبياري كم يا زياد نيز ممكن است بيماري را افزايش دهد، براي اجتناب از اين بيماري بايد از آبياري به موقع و كافي استفاده شود.
شخم با گاو آهن بر گرداندار يا استفاده از گاو آهن قلمي موثرترين راه نابود كردن عوامل بيماريزا در خاك است. همچنين برگرداندن كامل كود سبز محصولات با يك شخم عميق، بوسيله گاو آهن برگرداندار از ديگر راههاي مبارزه با بيماري است.
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مصرف زياد كود ازته، گندم را به بيماری فوزاريوم خوشه حساس ميكند |
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كوددهي بيش از حد و بالاخص مصرف زياد كود ازته، باعث حساس شدن گياه گندم به بيماري فوزاريوم خوشه ميشود.
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اصول تغذيه مركبات
مقدمه:
امروزه ديگر باغداري فقط بعنوان يك شغل نيست و بصورت يك حرفه و حتي يك هنر مطرح است كه همانند يك هنرمند با استفاده ي بهينه از سرمايه و ابزار و نهادهها بيشترين سود آوري را داشته باشد.
نحوه كاشت و عمليات نگهداري نهال مركبات شامل مراحل خاصي بوده و نياز به مهارت فراوان دارد . اما اكنون باغداران منطقه جنوب تقريباً در اين زمينه چيزي كم ندارند و هر باغدار حاوي دنيايي از اطلاعات و تجارب در زمينه كاشت مركبات است و به همين لحاظ به نظر مي رسد كه وقت آن فرا رسيده كه توجه خاصي را به تغذيه بهينه معطوف داشت.
درخت مركبات نيز همانند ساير گياهان به دو دسته از عناصر شامل ماكرو و ميكرو نياز دارد.
عناصر ماكرو:
ازت:
اين عنصر بعنوان غذاي اصلي كه نقش عمده ي آن در رشد سبزينه اي درخت است كه سبزي و شادابي را به درخت مي دهد. كمبود اين عنصر باعث مي شود برگهاي درخت به رنگ سبز مايل به زرد تبديل شده كه اين زردي ابتدا در برگهاي مسن ظاهر ميشود. ريزش بي موقع برگ ،كم شدن محصول و كوچك شدن ميوه و ريزش ميوه قبل از رسيدگي كامل از ديگر علائم كمبود ازت مي باشد. مناسبترين كود ازته براي مركبات كود سولفات آمونيوم است كه داراي21 % ازت باشد. در خصوص تأمين ازت درخت مركبات بايد توصيه شود كه نيمي از مصرف ساليانه درخت را قبل از زمان شكوفه دهي ( بهمن ماه ) كه درخت بيشترين نياز را دارد و نيم ديگر را در دو مرحله يكي وقتي كه ميوهها شروع به رشد نموده و به اصطلاح نخودي شده اند و مرحله بعد زمان رشد كامل ميوه به زمين داده مي شود .
بايد اين نكته را در نظر داشت كه كودهاي ازته بدليل حلال بودن در آب همواره با آب آبياري و بارندگي شسته و از دسترس گياه خارج شده و معمولاً هرساله بايد به خاك اضافه شود.
فسفر:
اين عنصر كه به شكل سوپر فسفات و فسفات آمونيوم در باغات مصرف مي شود، تأثير زيادي روي زودرسي ميوه دارد. مصرف آن باعث خوشرنگي ،بالارفتن كيفيت ميوه و عمل گردهافشاني را آسان ميكند. كمبود آن باعث كلفتي پوست ميوه و توخالي شدن آن ميشود، بطوريكه وقتي ميوه را برش ميزنيم حفره بزرگي در وسط ميوه ميبينيم . مات شدن رنگ برگها و ريزش بي موقع برگ نيز از ديگر علائم كمبود فسفر مي باشد . بهترين زمان مصرف فسفات قبل از شكوفه دهي، كه در مناطق جنوب برابر با بهمن ماه مي باشد.
پتاس:
مصرف پتاس در مركبات باعث افزايش رشد و نمو درخت ، درشت شدن ميوه ، مقاومت به بيماريها، جلوگيري از تركيدگي پوست و كمك به خشبي شدن شاخههاي جوان ميشود . شكل تركيدگي ميوه در چند سال اخير يكي از مشكلات بزرگ باغات جنوب است كه مصرف پتاس با مقاومتي كه در پوست ميوه ايجاد ميكند كه تا حد بسيار زيادي با اين مشكل مبارزه ميكند. با مصرف پتاس مقاومت گياه را به سرما نيز افزايش ميدهد . اين نوع كود بهتر است كه در اواخر زمستان قبل از شكوفهدهي به درخت بدهيم.
كودهاي ميكرو:
از جمله عناصر كم مصرف مورد نياز مركبات عبارتند از منيزيم ، آهن ، روي ، منگنز و مس . اين عناصر هر چند كه جزء عناصر كم مصرف ميباشند اما همين مقدار كه حتماً بايد براي درخت تأمين شود، چون اين عناصر بسياري از عمليات حياتي گياه را تحت تأثير قرار ميدهد. مثلاً با كم شدن آهن، روي و منگنز برگهاي درخت رو به زردي رفته و علاوه بر كاهش محصول مقدار بار دهي به تدريج سر شاخهها لخت و درخت ضعيف ميشود .
با مصرف كودهاي ميكرو تا حد زيادي ميتوان پديدهي سالآوري را كنترل كرده و مقاومت درخت را به سرما افزايش داد.
بهترين زمان مصرف اين عناصر در زمستان و در محل ريشههاي موئين گياه است و بهتر آن است كه به همراه كود حيواني و به صورت چالكود زير قطره چكانها مصرف شود.
كود حيواني:
كود حيواني علاوه بر تأمين قسمتي از نياز غذائي گياه تأثير بسيار مثبت در بهبود كيفيت خاك دارد. بيشترين تأثير كود حيواني اين است كه ساختمان فيزيكي خاك را بهبود بخشيده تا ريشه درخت بهتر بتواند تنفس كند و فضاي بهتري را جهت رشد و گسترش ريشه در اختيار داشته باشد.
يك نكته اساسي در خصوص مصرف كود حيواني اين مي باشد چون اين كودها براي پوسيده شدن از ازت خاك استفاده ميكند، بنابراين بايد در نظر داشت كه از كودهاي كاملاً پوسيده استفاده كرد و يا اگر كود كاملاً پوسيده نشده است مقداري كود ازته براي تسهيل در پوسيده شدن كود حيواني مصرف شود.
ميزان كود:
امروزه ديگر زمان آنكه يك نسخه عمومي براي سطح وسيعي از باغات پيچيده شود سر آمده است و تحت هيچ شرايطي صلاح نيست كه حتي براي دو باغ همجوار نيز مقدار واحدي توصيه شود. انجام آزمايش خاك و برگ ميتواند بطور صحيح مقدار مواد و عناصر موجود درخاك و برگ را مشخص نموده و با مقايسه اين دو نياز واقعي درخت را مشخص نمايد. در بسياري از موارد بروز علائم ظاهري نوعي كمبود دليل بر كم بودن آن عنصر در خاك نيست، بلكه ممكن است مصرف زيادي عناصر ديگر مانع جذب يك ماده غذائي شود. بعنوان مثال مصرف زيادي كودهاي فسفاته جذب عناصر روي و آهن را با مشكل مواجه ميسازد.
زمان و نحوه مصرف كود ها:
بيشترين نياز درخت به مواد غذائي زماني است كه شكوفهها ميخواهند ظاهر شوند ،بنابراين هميشه بايد اين نكته را در نظر داشته باشيم زماني كه گياه فعاليت خود را شروع ميكند بايد مواد غذائي به اندازه كافي در اختيار داشته باشد و مواد غذائي در محل قرار گرفته باشد كه ريشه براحتي بتواند آن را جذب نموده و به مصرف درخت برساند.
بنابراين بهترين كار اين است كه در بهمن ماه كود هاي مورد نياز درخت اعم از ماكرو و ميكرو را با كود حيواني مخلوط و در حد نهائي سايه انداز درخت در زير قطره چكانها در اطراف درخت و درست در محلي كه ريشههاي موئين فعاليت ميكنند (يعني 10 تا 30 سانتيمتري سطح خاك) بصورت چالكود دفن كرده و قطره چكانها را دقيقاً روي چالكود قرار داده تا كود به راحتي در آب حل شده و در اختيار ريشه قرار بگيرد.
چنانچه عناصر ميكرو در اواخر زمستان به خاك داده نشود و گياه نياز به عناصر كم مصرف داشته باشد، توصيه ميشود كه اين عناصر را به روش محلولپاشي و در صورت نياز به سمپاشي همراه با سموم شيميايي مصرف شود.




